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Home»छत्तीसगढ़»पुस्तक समीक्षा – सर्वोदय की भावना है –साझा संग्रह “सर्वोदय “में : डॉ राघवेंद्र दुबे वरिष्ठ साहित्यकार
छत्तीसगढ़

पुस्तक समीक्षा – सर्वोदय की भावना है –साझा संग्रह “सर्वोदय “में : डॉ राघवेंद्र दुबे वरिष्ठ साहित्यकार

nimbletech.developer@gmail.comBy nimbletech.developer@gmail.comApril 1, 2026No Comments5 Mins Read
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साहित्यिक समीक्षा 1 अप्रैल 2026/ सामूहिकता में ताकत ही नहीं सही दिशा भी मिलती है । यही सहयोग एवं दिशा देने का महत्वपूर्ण दायित्व कोटा बिलासपुर की साहित्यिक समिति “ सर्वोदय साहित्य एवं कला मंच “ निभा रही है । समिति की संस्थापक अध्यक्ष सोमप्रभा ‘नूर’जो स्वयं कुशल मंच संचालिका,कवयित्री हैं । अपनी सतत् सृजन शीलता के साथ अपने साहित्यिक मित्रों को भी आगे बढ़ने की दिशा दर्शित करती हैं । इसी क्रम में वे प्रतिवर्ष साझा संग्रह “ सर्वोदय “ का प्रकाशन भी करती हैं ।इस साझा संग्रह के तृतीय अंक में उन्होंने छत्तीसगढ़ के 72 साहित्यकारों की प्रतिनिधि रचनाओं को स्थान दिया है जिसमें साहित्यकारों के फोटो, परिचय सहित उनकी कविता,कहानी,आलेख हैं ।
अपनी संपादकीय में उन्होंने लिखा है कि-“ कालजयी सृजन सदैव ही सत्यम शिवम सुंदरम की संयुक्त व्याख्या होती है तथा ऐसे सृजन को सहेज कर रखना और उसे आधार पर भविष्य के लिए दिशा निर्धारित करना एक जिम्मेदार समाज का मुख्य दायित्व होता है । साहित्यकार समाज से परे नहीं अतः साहित्यकर्म केवल लेखन और आत्मविश्वास मात्रा नहीं अपितु अपने हृदय में सर्वोदय की भावना को स्थापित कर सामूहिक साहित्यिक उन्नयन की ओर निरंतर प्रगतिशील रहना भी है । जीवन के प्रत्येक संकल्पित कार्य के मार्ग में बाधाओं का हस्तक्षेप होना तो स्वाभाविक है किंतु सर्वोदय विकास के लिए नामित व्यक्ति के लिए सर्वाधिक आवश्यक है स्वयं की सृजनात्मक पर विश्वास और बहुजन हिताय हेतु कृत संकल्पित बने रहना ।
सर्वोदय साझा संग्रह ने सदैव यह प्रयास किया है कि साहित्य में समाहित विविध दृष्टिकोण को क्षेत्रगत भाषागत परंपरागत विधागत या व्यक्तिगत भेदभाव किए बिना एक ही मंच पर साथ-साथ प्रतिष्ठित किया जा सके । एक ऐसा मंच जो भारतीय संस्कृति की भांति ही विविधता से परिपूर्ण होने के बावजूद संतुलित और सम्मिलित हो हमें निरंतर आशा और विश्वास के साथ आगे बढ़ते रहना है क्योंकि प्रवहमान धारा सदैव निर्मल होती है ।
सर्वोदय साहित्य समिति भी अपने विस्तार की ओर निरंतर इसी अध्याय के साथ अग्रसर हो रही है नाम के अनुरूप ही सर्वोदय सझा संग्रह में साहित्य की दोनों विधाओं के विभिन्न उपविधाओं पर हिंदी तथा छत्तीसगढ़ी भाषा की रचनाओं के रूप में वरिष्ठ तथा नवोदित कलमकारों की लेखनी चली है। जहां नए कलमकार अपने अंग्रेजों से परंपरा विधान और विचारों की सीख लेंगे वहीं वरिष्ठ साहित्यकार इस बात से अवगत होंगे कि वर्तमान पीढ़ी के रचनाकारों की मानसिकता किस दिशा में अग्रसर हो रही है ।आज मैं अत्यंत आनंदित हूं क्योंकि आज से लगभग 3 वर्ष पूर्व जब मैं सर्वोदय साहित्य कला मंच कोटा के रूप में एक सुंदर स्वप्न देखा था तब यह कार्य मेरे लिए अत्यंत ही चुनौती पूर्ण था किंतु नेक विचारों को समर्थन जरूर मिलता है तथा जब संकल्प हेतु पुरुषार्थ किया जाता है तब प्रकृति भी इस प्रक्रिया में बराबर ही की सहभागी बन जाती है । इस संदर्भ में मजरूह सुल्तानपुरी की यह पंक्ति अक्सर मुझे उत्साहित करती रहती है कि –” मैं अकेला ही चला था जानि बे मंजिल मगर लोग साथ आते गए और कारवां बनता गया । “
वहीं इस कृति में अपनी शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए देश के प्रख्यात गीतकार डॉ विष्णु सक्सेना ने लिखा है कि “ शब्द जब मन की गहराइयों से निकलते हैं तो वे केवल अभिव्यक्ति नहीं रह जाते बल्कि एक ऐसी प्रतीक्षा को जन्म देते हैं जो समय के साथ परिपक्व होती जाती हैं । सर्वोदय साहित्य कला मंच कोटा बिलासपुर छत्तीसगढ़ का यह तृतीय वार्षिक अंक इस रचनात्मक प्रतीक्षा का साकार रूप है, जहां जीवन के पहले पड़ाव में देखे गए अधूरे स्वप्न भी अपनी संपूर्णता की संभावना तलाशते दिखाई देते हैं । इस अंक में संकलित रचनाएं स्मृतियां, अनुभूतियों और संवेदनाओं के उन कोमल परतों को छूती हैं, जो हमारे ही भीतर कहीं गहराई में सुरक्षित रहती हैं और अवसर पाते ही शब्दों के रूप में प्रकट हो जाती हैं ।
यह प्रकाशन उन सांसों की तरह है जो निरंतर चलती रहती हैं, ना कभी थकती हैं ना ही निराश होती हैं और साहित्य के प्रति अटूट विश्वास को जीवित रखती है । प्रेम, प्रतीक्षा और संवेदना के इस संगम में पाठक स्वयं को उन मीठी यादों के समीप पाएगा, जहां चारों ओर केवल अनुभूति का उजास होगा ।हम कामना करते हैं कि समिति का यह तृतीय सजा संग्रह साहित्यिक चेतना को और व्यापक करे, नए विचारों को जन्म दे और पाठकों के हृदय में दीर्घकाल तक अपनी उपस्थिति दर्ज कराए ।“
वहीं इस कृति में अपनी शुभकामना देते हुए देश के सुविख्यात साहित्यकार, समीक्षक डॉ विनय कुमार पाठक पूर्व अध्यक्ष छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग एवं कुलपति थावे विद्यापीठ गोपालगंज बिहार ने लिखा है कि “सोमप्रभा तिवारी ‘नूर’ जी के संपादन में प्रकाशित सर्वोदय साझा संग्रह पुराने चर्चित ,अचर्चित साहित्यकारों का लेखा दस्तावेज है जिसमें गद्य और पद्य दोनों विधाओं का समावेश है जो लोकल से ग्लोबल तक की यात्रा का साक्ष्य प्रस्तुत करता है ।“
वहीं छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध गीतकार मीर अली मीर रायपुर ने लिखा है कि –”एक सम्मिलित प्रयास से संसार में सपने को संजोना एक अच्छी बात है । मर्यादा और संस्कार ने हमें सदैव प्रफुल्लित किया है । सर्वोदय साझा संग्रह का सद्प्रयास गद्य और पद्य के नव कलमकारों को रचनात्मकता की ओर ले जाता है । हमें और हमारे समाज को संदेश देती रचनाओं का स्वागत करते हुए हर्ष का अनुभव होता रहे । हिंदी और छत्तीसगढ़ी के भाषा सौंदर्य के लिए मेरी हार्दिक शुभकामनाएं ।“
इस तरह स्पष्ट होता है कि सर्वोदय साझा संग्रह अपने नाम के अनुरूप सर्वोदय, सर्व विकास के उद्देश्य में सफल हुई है। इस अनुपम साझा संग्रह के प्रकाशन के लिए मैं संपादक एवं संस्थापक अध्यक्ष सोमप्रभा ‘नूर’ एवं उनके समस्त समस्त साहित्यिक बंधुओं को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देता हूं

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