Close Menu
korbalive.comkorbalive.com
  • होम
  • देश दुनिया
  • छत्तीसगढ़
    • कोरबा
    • अंबिकापुर
    • कोंडागाँव
    • जांजगीर चांपा
    • दुर्ग
    • जगदलपुर
    • धमतरी
    • दंतेवाड़ा
    • बलौदाबाजार
    • भटगांव
    • महासमुंद
    • रायगढ़
    • राजनांदगांव
    • रायपुर
    • देश दुनिया
    • सारंगढ़ बिलाईगढ़
  • मध्य प्रदेश
    • डिंडोरी
      • समनापुर
      • सरसीवा
      • सलिहा
  • राजनीति
  • मेरा शहर

Subscribe to Updates

Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.

What's Hot

मजाक बना खूनी खेल: गाली देने से रोका तो युवक पर ताबड़तोड़ चाकू हमला, आरोपी गिरफ्तार

May 13, 2026

CBSE बोर्ड ने जारी किया 12वीं का परिणाम, छात्र तुरंत करें चेक

May 13, 2026

शराब के पैसों से इनकार पड़ा भारी, नुकीले हमलों का आरोपी व्हीलचेयर पर गिरफ्तार

May 13, 2026
Facebook X (Twitter) Instagram
Friday, June 5
Facebook X (Twitter) Instagram
korbalive.comkorbalive.com
Demo
  • होम
  • देश दुनिया
  • छत्तीसगढ़
    • कोरबा
    • अंबिकापुर
    • कोंडागाँव
    • जांजगीर चांपा
    • दुर्ग
    • जगदलपुर
    • धमतरी
    • दंतेवाड़ा
    • बलौदाबाजार
    • भटगांव
    • महासमुंद
    • रायगढ़
    • राजनांदगांव
    • रायपुर
    • देश दुनिया
    • सारंगढ़ बिलाईगढ़
  • मध्य प्रदेश
    • डिंडोरी
      • समनापुर
      • सरसीवा
      • सलिहा
  • राजनीति
  • मेरा शहर
korbalive.comkorbalive.com
Home»छत्तीसगढ़»11 अप्रैल जयंती पर विशेष – भारतीय सिनेमा के अमर स्वर व महान गायक कुंदन लाल सहगल
छत्तीसगढ़

11 अप्रैल जयंती पर विशेष – भारतीय सिनेमा के अमर स्वर व महान गायक कुंदन लाल सहगल

nimbletech.developer@gmail.comBy nimbletech.developer@gmail.comApril 12, 2026No Comments3 Mins Read
Facebook Twitter WhatsApp Copy Link
Share
Facebook Twitter WhatsApp Copy Link

सुरेश सिंह बैस “शाश्वत” भारतीय सिनेमा और संगीत के इतिहास में कुछ नाम ऐसे होते हैं, जो समय के साथ धुंधले नहीं पड़ते, बल्कि और अधिक उज्ज्वल होते जाते हैं। कुंदन लाल सहगल ऐसा ही एक नाम है एक ऐसा स्वर, जिसने न केवल अपने दौर को परिभाषित किया, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए गायन की दिशा भी तय कर दी।
बीसवीं सदी के प्रारंभिक दशकों में जब भारतीय सिनेमा अपने शैशवकाल में था, तब तकनीकी सीमाएँ थीं, पर कला की आत्मा प्रबल थी। इसी दौर में सहगल का उदय हुआ। एक ऐसे गायक के रूप में, जिसकी आवाज़ में दर्द, मिठास और आत्मीयता का अद्भुत संगम था। उनकी गायकी में शास्त्रीयता की गहराई थी, परंतु वह आम जनमानस के दिल तक सहजता से पहुँचती थी। यही कारण है कि वे केवल गायक नहीं, बल्कि भावनाओं के दूत बन गए ।देवदास जैसी फिल्मों ने उन्हें अमर कर दिया। ‘बाबुल मोरा नैहर छूटो जाए’ जैसे गीतों में उन्होंने जो विरह का स्वर छेड़ा, वह आज भी श्रोताओं के हृदय को स्पर्श करता है। उनकी आवाज़ में जो करुण रस था, वह अभिनय के साथ मिलकर एक जीवंत अनुभव बन जाता था। यही उनकी सबसे बड़ी विशेषता थी..वे गाते नहीं थे, वे जीते थे।
सहगल का संगीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं था, बल्कि वह एक सांस्कृतिक धरोहर बन गया। उनकी गायकी में भारतीयता की सुगंध थी ,रागों की शुद्धता, शब्दों की स्पष्टता और भावों की प्रामाणिकता। उन्होंने यह सिद्ध किया कि सादगी ही सबसे बड़ी कला है। बिना किसी कृत्रिमता के, केवल अपनी स्वाभाविक आवाज़ के बल पर उन्होंने जो ऊँचाइयाँ प्राप्त कीं, वह आज के तकनीकी युग में भी प्रेरणास्रोत है।
उनकी यात्रा आसान नहीं थी। रेलवे में टाइमकीपर और टाइपराइटर कंपनी में सेल्समैन जैसी साधारण नौकरियों से लेकर कोलकाता के न्यू थियेटर्स तक का सफर संघर्षों से भरा था। परंतु यह संघर्ष ही उनके स्वर में वह गहराई लेकर आया, जिसने उन्हें अद्वितीय बना दिया। उनकी सफलता इस बात का प्रमाण है कि प्रतिभा, यदि समर्पण से जुड़ जाए, तो वह किसी भी बाधा को पार कर सकती है।
सहगल की सबसे बड़ी देन यह है कि उन्होंने भारतीय फिल्म संगीत की नींव को मजबूत किया। उनके बाद के महान गायक चाहे वे मोहम्मद रफ़ी हों, मुकेश हों या किशोर कुमार सभी कहीं न कहीं सहगल की परंपरा से ही प्रेरित हैं। उन्होंने प्लेबैक सिंगिंग के उस दौर की शुरुआत की, जिसने भारतीय सिनेमा को नई पहचान दी।
आज जब संगीत में तकनीकी चमत्कारों का बोलबाला है, तब सहगल की याद हमें यह सिखाती है कि असली जादू मशीनों में नहीं, बल्कि इंसान की आत्मा में होता है। उनकी आवाज़ में जो सच्चाई थी, वही उन्हें अमर बनाती है।
उनकी जयंती 11 अप्रैल केवल एक तिथि नहीं, बल्कि भारतीय संगीत के स्वर्णिम अध्याय को याद करने का अवसर है। यह वह क्षण है, जब हम न केवल उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं, बल्कि उनकी कला से प्रेरणा लेकर अपने सांस्कृतिक मूल्यों को भी सहेजने का संकल्प लेते हैं। कुंदन लाल सहगल केवल एक कलाकार नहीं, बल्कि एक युग हैं।एक ऐसा युग, जिसकी गूंज आज भी हर सुर में, हर गीत में और हर दिल में सुनाई देती है। उनके स्वर की यह अमरता ही उनकी सबसे बड़ी विरासत है।शत-शत नमन उस कालजयी गायक को, जिसने संगीत को आत्मा की आवाज़ बना दिया।

– सुरेश सिंह बैस “शाश्वत”
– बिलासपुर ,छत्तीसगढ़

Share. Facebook Twitter WhatsApp Copy Link
nimbletech.developer@gmail.com
  • Website

Related Posts

मजाक बना खूनी खेल: गाली देने से रोका तो युवक पर ताबड़तोड़ चाकू हमला, आरोपी गिरफ्तार

May 13, 2026

CBSE बोर्ड ने जारी किया 12वीं का परिणाम, छात्र तुरंत करें चेक

May 13, 2026

शराब के पैसों से इनकार पड़ा भारी, नुकीले हमलों का आरोपी व्हीलचेयर पर गिरफ्तार

May 13, 2026

वट सावित्री : स्त्री की आस्था, संकल्प और अमर शक्ति का पर्व

May 13, 2026

एक ओर पानी के लिए त्राहि-त्राहि, दूसरी ओर हजारों लीटर पानी की बर्बादी

May 13, 2026

उच्च शिक्षा के समग्र विकास पर राज्यपाल रमेन डेका एवं अटल विवि के पूर्व कुलपति आचार्य बाजपेयी के बीच सार्थक चर्चा

May 13, 2026

Comments are closed.

पोस्ट

मजाक बना खूनी खेल: गाली देने से रोका तो युवक पर ताबड़तोड़ चाकू हमला, आरोपी गिरफ्तार

May 13, 2026

CBSE बोर्ड ने जारी किया 12वीं का परिणाम, छात्र तुरंत करें चेक

May 13, 2026

शराब के पैसों से इनकार पड़ा भारी, नुकीले हमलों का आरोपी व्हीलचेयर पर गिरफ्तार

May 13, 2026

वट सावित्री : स्त्री की आस्था, संकल्प और अमर शक्ति का पर्व

May 13, 2026
पोस्ट कैलेंडर
June 2026
M T W T F S S
1234567
891011121314
15161718192021
22232425262728
2930  
« May    
Follow For More
  • Facebook
  • Twitter
  • Instagram
  • YouTube
  • WhatsApp
© 2026 The Bharat Times. Designed by Nimble Technology.

Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.