Close Menu
korbalive.comkorbalive.com
  • होम
  • देश दुनिया
  • छत्तीसगढ़
    • कोरबा
    • अंबिकापुर
    • कोंडागाँव
    • जांजगीर चांपा
    • दुर्ग
    • जगदलपुर
    • धमतरी
    • दंतेवाड़ा
    • बलौदाबाजार
    • भटगांव
    • महासमुंद
    • रायगढ़
    • राजनांदगांव
    • रायपुर
    • देश दुनिया
    • सारंगढ़ बिलाईगढ़
  • मध्य प्रदेश
    • डिंडोरी
      • समनापुर
      • सरसीवा
      • सलिहा
  • राजनीति
  • मेरा शहर

Subscribe to Updates

Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.

What's Hot

मजाक बना खूनी खेल: गाली देने से रोका तो युवक पर ताबड़तोड़ चाकू हमला, आरोपी गिरफ्तार

May 13, 2026

CBSE बोर्ड ने जारी किया 12वीं का परिणाम, छात्र तुरंत करें चेक

May 13, 2026

शराब के पैसों से इनकार पड़ा भारी, नुकीले हमलों का आरोपी व्हीलचेयर पर गिरफ्तार

May 13, 2026
Facebook X (Twitter) Instagram
Friday, June 5
Facebook X (Twitter) Instagram
korbalive.comkorbalive.com
Demo
  • होम
  • देश दुनिया
  • छत्तीसगढ़
    • कोरबा
    • अंबिकापुर
    • कोंडागाँव
    • जांजगीर चांपा
    • दुर्ग
    • जगदलपुर
    • धमतरी
    • दंतेवाड़ा
    • बलौदाबाजार
    • भटगांव
    • महासमुंद
    • रायगढ़
    • राजनांदगांव
    • रायपुर
    • देश दुनिया
    • सारंगढ़ बिलाईगढ़
  • मध्य प्रदेश
    • डिंडोरी
      • समनापुर
      • सरसीवा
      • सलिहा
  • राजनीति
  • मेरा शहर
korbalive.comkorbalive.com
Home»छत्तीसगढ़»(विचार / विश्लेषण) महर्षि अरविंद: क्रांतिकारी चेतना से आध्यात्मिक शिखर तक
छत्तीसगढ़

(विचार / विश्लेषण) महर्षि अरविंद: क्रांतिकारी चेतना से आध्यात्मिक शिखर तक

nimbletech.developer@gmail.comBy nimbletech.developer@gmail.comApril 21, 2026No Comments4 Mins Read
Facebook Twitter WhatsApp Copy Link
Share
Facebook Twitter WhatsApp Copy Link

सुरेश सिंह बैस “शाश्वत”21 अप्रैल 2026/ भारत की स्वतंत्रता में अरविंद घोष का योगदान अविस्मरणीय तो है ही, परंतु स्वातन्त्र्योत्तर काल में उन्होंने भारतीय जनता के परिष्कार का जो स्तुत्य कार्य किया, वह उन्हें ‘महर्षि’ के पद पर प्रतिष्ठित कर गया। उनकी जीवन-यात्रा पर नजर दौड़ाएं तो आश्चर्य होता है कि कैसे एक शांत-सौम्य अध्यापक और लेखक, क्रांतिकारी सेनानी बना और फिर एक संत महर्षि। इन तीनों भूमिकाओं का निर्वहन किसी एक ही व्यक्ति द्वारा पूरी कुशलता और सफलता के साथ किया जाना अत्यंत दुर्लभ है।
15 अगस्त को जन्मे आजादी के इस महान योद्धा ने मानव चेतना के परम विकास के लिए कठोर साधना की। जब भारत की पावन भूमि ब्रिटिश हुकूमत के पैरों तले रौंदी जा रही थी, तब एक प्रतिष्ठित महाविद्यालय के इस अध्यापक ने जन्मभूमि की रक्षार्थ सर्वस्व त्याग कर स्वतंत्रता संग्राम में छलांग लगा दी। राष्ट्रीय आंदोलन की एक शाखा क्रांतिकारी मार्ग की ओर अग्रसर हुई, जिसका नेतृत्व अरविंद घोष ने किया। इसके परिणामस्वरूप क्रांतिकारी गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बंगाल बन गया। बंगाल से प्रकाशित होने वाले समाचार पत्रों ‘युगांतर’, ‘संध्या’ तथा ‘नवशक्ति’ आदि में अपने ओजस्वी लेखन के द्वारा अरविंद घोष ने देशवासियों को राष्ट्र पर न्योछावर होने के लिए आह्वान किया।
अरविंद घोष के अनुज वारिन्द्र घोष के नेतृत्व में बंगाल के क्रांतिकारियों ने अंग्रेजी हुकूमत की जड़ें हिलानी प्रारंभ कर दीं। क्रांतिकारी कार्यों के लिए कोलकाता में ‘अनुशीलन समिति’ का गठन किया गया, जिसका उद्देश्य बंगाल के ग्रामीण क्षेत्रों में क्रांतिकारियों को प्रशिक्षित करना था। इसके पश्चात क्रांतिकारी गतिविधियों में तब तेजी आई जब लॉर्ड हार्डिंग की रेलगाड़ी को बम से उड़ाने का प्रयास किया गया। इसके बाद कई ऐसी साहसिक घटनाएं हुईं, जिन्होंने अंग्रेज सरकार की नींद हराम कर दी।
इसी क्रम में 30 अप्रैल 1908 की संध्या को बिहार के मुजफ्फरपुर में एक नया मोड़ आया, जब खुदीराम बोस और प्रफुल्ल चाकी ने एक घोड़ागाड़ी पर बम फेंका। उनका अनुमान था कि उस गाड़ी में क्रूर ब्रिटिश जज किंग्सफोर्ड बैठा है। किंग्सफोर्ड कोलकाता का प्रेसीडेंसी मजिस्ट्रेट था, जिसने कई आंदोलनकारियों को अन्यायपूर्वक कठोर सजाएं दी थीं। यही कारण था कि अरविंद घोष की गुप्त समिति ने उसे मृत्युदंड देने का निश्चय किया था। परंतु दुर्भाग्य से वह बच गया और उस गाड़ी में सवार अन्य अंग्रेज अफसर कैनेडी की पत्नी व पुत्री की मृत्यु हो गई। इस घटना के बाद खुदीराम बोस को फांसी दे दी गई और प्रफुल्ल चाकी ने पकड़े जाने के भय से आत्महत्या कर ली।
ब्रिटिश सरकार इस घटना से बौखला उठी और उसने अंधाधुंध गिरफ्तारियां व छापे मारने शुरू कर दिए। परिणामस्वरूप, अरविंद घोष के भाई वारिन्द्र घोष और उनके अन्य चौदह साथी कोलकाता के माणिकतल्ला गार्डन हाउस (मुरारीपुर) से पकड़े गए, जो उनका मुख्य कार्यस्थल और बम बनाने का केंद्र था। ब्रिटिश पुलिस ने अरविंद घोष की भी सरगर्मी से तलाश शुरू कर दी और उनका नाम कई अन्य वारदातों से भी जोड़ दिया।
अरविंद घोष उस समय बंगाल के राष्ट्रीय आंदोलन के प्रखर नेता थे। उनका स्वर्ण जैसा खरा चरित्र, त्याग और असाधारण विद्वत्ता न केवल बंगाल बल्कि पूरे देश में प्रशंसित थी। उनके नाम को ‘देशद्रोही’ के रूप में घसीटे जाने पर जनता में भारी रोष व्याप्त हो गया। अंततः अरविंद घोष को गिरफ्तार कर लिया गया। उनका मुकदमा उनके सहपाठी रहे जज बीचक्रॉफ्ट की अदालत में चला। कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में दोनों साथ पढ़े थे, जहाँ अरविंद ने बीचक्रॉफ्ट से अधिक अंक प्राप्त किए थे।
बचाव पक्ष की ओर से सुप्रसिद्ध बैरिस्टर चितरंजन दास (सी.आर. दास) ने जो ऐतिहासिक पैरवी की, वह बेमिसाल थी। उनके तर्कों और वकालत ने अरविंद घोष को सभी आरोपों से मुक्त करा दिया और वे निर्दोष साबित हुए। रिहा होने के पश्चात अरविंद घोष ने राजनीतिक गतिविधियों का त्याग कर दिया। अलीपुर जेल में मिले आध्यात्मिक बोध को स्वीकार कर वे पांडिचेरी चले गए और वहां तप-साधना में लीन हो गए। 15 अगस्त 1947 को उनका स्वप्न साकार हुआ। अरविंद ने इसके लिए वर्षों की यातनाएं सही थीं और अनेक महापुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर स्वाधीनता का संग्राम लड़ा था। अंततः उनकी साधना का सुफल राष्ट्र की स्वतंत्रता के रूप में मिला। *इस अवसर पर कृतज्ञ राष्ट्र ने उनसे संदेश देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा:
“15 अगस्त स्वाधीन भारत का जन्मदिन है और यह मेरा अपना जन्मदिन भी है। मैं अपने जन्मदिन को भारतीय स्वाधीनता दिवस के साथ इस प्रकार एकाकार हो जाने को कोई संयोग नहीं मानता, बल्कि इसे उस दैवीय शक्ति का संकेत मानता हूँ जिसने मेरे जीवन के लक्ष्य को अपनी स्वीकृति दी है। मैं बस इतना ही कर सकता हूँ कि उन लक्ष्यों और आदर्शों की घोषणा कर दूँ, जिन्हें मैं अपनी बाल्यावस्था और यौवन से पोसता आया हूँ, क्योंकि वे भारत की स्वाधीनता और उसके उज्ज्वल भविष्य से संबद्ध हैं।”
इसके पश्चात महर्षि अरविंद जीवनपर्यंत पांडिचेरी आश्रम के माध्यम से देश, समाज और आध्यात्मिक चेतना की सेवा में निरंतर संलग्न रहे।

सुरेश सिंह बैस”शाश्वत”
-बिलासपुर छत्तीसगढ़

Share. Facebook Twitter WhatsApp Copy Link
nimbletech.developer@gmail.com
  • Website

Related Posts

मजाक बना खूनी खेल: गाली देने से रोका तो युवक पर ताबड़तोड़ चाकू हमला, आरोपी गिरफ्तार

May 13, 2026

CBSE बोर्ड ने जारी किया 12वीं का परिणाम, छात्र तुरंत करें चेक

May 13, 2026

शराब के पैसों से इनकार पड़ा भारी, नुकीले हमलों का आरोपी व्हीलचेयर पर गिरफ्तार

May 13, 2026

वट सावित्री : स्त्री की आस्था, संकल्प और अमर शक्ति का पर्व

May 13, 2026

एक ओर पानी के लिए त्राहि-त्राहि, दूसरी ओर हजारों लीटर पानी की बर्बादी

May 13, 2026

उच्च शिक्षा के समग्र विकास पर राज्यपाल रमेन डेका एवं अटल विवि के पूर्व कुलपति आचार्य बाजपेयी के बीच सार्थक चर्चा

May 13, 2026

Comments are closed.

पोस्ट

मजाक बना खूनी खेल: गाली देने से रोका तो युवक पर ताबड़तोड़ चाकू हमला, आरोपी गिरफ्तार

May 13, 2026

CBSE बोर्ड ने जारी किया 12वीं का परिणाम, छात्र तुरंत करें चेक

May 13, 2026

शराब के पैसों से इनकार पड़ा भारी, नुकीले हमलों का आरोपी व्हीलचेयर पर गिरफ्तार

May 13, 2026

वट सावित्री : स्त्री की आस्था, संकल्प और अमर शक्ति का पर्व

May 13, 2026
पोस्ट कैलेंडर
June 2026
M T W T F S S
1234567
891011121314
15161718192021
22232425262728
2930  
« May    
Follow For More
  • Facebook
  • Twitter
  • Instagram
  • YouTube
  • WhatsApp
© 2026 The Bharat Times. Designed by Nimble Technology.

Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.