रायगढ़ 9 मई 2026/ सरकारी नौकरी का सपना दिखाकर युवती से लाखों रुपये ऐंठने वाला शातिर आखिरकार रायगढ़ पुलिस के शिकंजे में आ गया। कलेक्ट्रोरेट सारंगढ़ में कम्प्यूटर ऑपरेटर की नौकरी दिलाने का झांसा देकर 3 लाख 38 हजार 500 रुपये की ठगी करने वाले आरोपी हरीश मिश्रा को थाना कोतरारोड़ पुलिस ने जशपुर से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। आरोपी ने न केवल नकद और ऑनलाइन रकम वसूली बल्कि फर्जी नियुक्ति पत्र थमाकर महीनों तक युवती को भरोसे के जाल में फंसाए रखा। मामला तब फूटा जब ग्राम कोतरा निवासी 27 वर्षीय कुमारी पदिमनी यादव कलेक्ट्रोरेट रायगढ़ पहुंची और जांच में उसका नियुक्ति पत्र पूरी तरह फर्जी निकला। इसके बाद 03 अप्रैल 2026 को थाना कोतरारोड़ में शिकायत दर्ज कराई गई। जांच में सामने आया कि आरोपी ने 09 फरवरी 2026 से 22 मार्च 2026 के बीच अलग-अलग तारीखों में नौकरी लगवाने के नाम पर रकम वसूली थी। आरोपी ने “कॉल मी सर्विसेस” नामक संस्था का फर्जी नियुक्ति पत्र तैयार करवाकर पीड़िता तक पहुंचाया और लगातार ज्वाइनिंग का झूठा भरोसा देता रहा। थाना कोतरारोड़ पुलिस ने अपराध क्रमांक 104/2026 के तहत धारा 318(4) बीएनएस में मामला दर्ज कर जांच शुरू की। एसएसपी शशि मोहन सिंह के निर्देशन में प्रशिक्षु डीएसपी अजय नागवंशी और थाना प्रभारी की टीम ने आरोपी की तलाश में लगातार दबिश दी लेकिन आरोपी फरार होकर जशपुर में छिपा बैठा था। मुखबिर की सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने तत्काल जशपुर पहुंचकर घेराबंदी की और आरोपी को हिरासत में ले लिया। पूछताछ में आरोपी ने पूरा खेल कबूल कर लिया और बताया कि ठगी की अधिकांश रकम खर्च कर चुका है। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से घटना में प्रयुक्त रियलमी मोबाइल फोन और 900 रुपये नकद जब्त किए हैं। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि आरोपी पहले श्रम विभाग रायगढ़ में भृत्य के पद पर कार्यरत रह चुका है और उसके व्यवहार को लेकर पहले भी शिकायतें मिल चुकी थीं। इस कार्रवाई में निरीक्षक शील कुमार आदित्य, आरक्षक बलराम साहू, अजय साय और जशपुर क्राइम डीएसपी भावेश कुमार समरथ की टीम की अहम भूमिका रही। रायगढ़ पुलिस ने युवाओं और अभिभावकों को साफ चेतावनी दी है कि सरकारी नौकरी, भर्ती या प्रभाव का झांसा देकर पैसे मांगने वालों से सतर्क रहें और केवल अधिकृत शासकीय माध्यमों पर ही भरोसा करें। बहरहाल यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि नौकरी की मजबूरी और सरकारी पोस्ट का लालच साइबर और फ्रॉड गिरोहों का सबसे बड़ा हथियार बन चुका है।
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