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Home»छत्तीसगढ़»न्यायधानी के बादाम कांड ने खोली हाउसिंग बोर्ड के लचर कार्य संस्कृति की
छत्तीसगढ़

न्यायधानी के बादाम कांड ने खोली हाउसिंग बोर्ड के लचर कार्य संस्कृति की

nimbletech.developer@gmail.comBy nimbletech.developer@gmail.comApril 21, 2026No Comments3 Mins Read
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बिलासपुर 21 अप्रैल 2026/ लगता है बादाम खाने से सचमुच याददास्त तेज होती है। कम से कम बिलासपुर में तो यह बात साबित हुई है। हाउसिंग बोर्ड में खोई हुई फ़ाइल जो साल भर से नहीं मिल रही थी, बादाम खाते ही चार घंटे में मिल गई लेकिन अकल आने के लिए शक्ल बिगाड़ने वाली महिला इस पूरे कांड के साथ राजधानी रायपुर पहुंच गई। शहर के अभिलाषा परिसर, तिफरा स्थित हाउसिंग बोर्ड कार्यालय में सामने आए बहुचर्चित “बादाम कांड” ने सरकारी तंत्र की कार्यशैली और कथित भ्रष्टाचार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक हितग्राही द्वारा अनोखे विरोध के जरिए उजागर हुए इस मामले में विभाग ने संबंधित कर्मचारियों पर कार्रवाई तो की है, लेकिन इसे महज औपचारिक और अपर्याप्त बताया जा रहा है।

सालभर तक अटकी रही नामांतरण प्रक्रिया

पीड़ित तोरण साहू ने ईडब्ल्यूएस श्रेणी का फ्लैट खरीदकर 17 मार्च 2025 को नामांतरण के लिए आवेदन किया था। सामान्यतः यह प्रक्रिया 1 से 2 माह में पूरी हो जाती है, लेकिन एक वर्ष से अधिक समय बीतने के बाद भी मामला लंबित रहा। संबंधित अधिकारी पूनम बंजारे हर बार यह कहकर टालती रहीं कि नामांतरण हो चुका है, लेकिन फाइल नहीं मिल रही है। इस दौरान आवेदक को 50 से अधिक बार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़े।

बादाम’ से जताया विरोध, वायरल हुआ वीडियो

लगातार टालमटोल से परेशान होकर तोरण साहू ने विरोध का अनोखा तरीका अपनाया। वह आधा किलो बादाम लेकर कार्यालय पहुंचे और अधिकारी की मेज पर बिखेरते हुए कहा कि “इसे खाने से शायद याददाश्त तेज हो जाए और फाइल मिल जाए।”घटना का वीडियो सामने आने के बाद यह मामला तेजी से वायरल हो गया और विभाग की कार्यप्रणाली पर व्यापक चर्चा शुरू हो गई।

जांच में खुली लापरवाही की परतें

मामले के तूल पकड़ने के बाद विभाग हरकत में आया और कार्यालय बंद होने के बावजूद आवेदक को बुलाकर फाइल की तलाश शुरू की गई। महज चार घंटे में फाइल मिल गई, लेकिन जांच में सामने आया कि फाइल पर वास्तविक रूप से कोई प्रगति ही नहीं हुई थी। रिकॉर्ड के अनुसार, 11 नवंबर 2025 को नामांतरण प्रक्रिया के तहत आम सूचना प्रकाशन के लिए पत्र तैयार कर हस्ताक्षरित किया गया था और जावक भी कर दिया गया था, लेकिन यह पत्र आवेदक तक कभी पहुंचाया ही नहीं गया और फाइल में ही दबा रहा।

कार्रवाई: अटैचमेंट तक सीमित

प्रकरण उजागर होने के बाद छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल ने कार्यपालन अभियंता प्रभारी संपदा अधिकारी एल.जी. बंजारे और कॉलोनी प्रभारी पूनम बंजारे को मुख्यालय रायपुर अटल नगर में अटैच कर दिया गया है।हालांकि, इस कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि गंभीर लापरवाही और संभावित भ्रष्टाचार के मामले में केवल स्थानांतरण जैसी कार्रवाई क्या पर्याप्त है।

भ्रष्टाचार पर तीखी प्रतिक्रिया

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद लोगों में आक्रोश देखा जा रहा है। आम नागरिकों का आरोप है कि कई सरकारी कार्यालयों में बिना रिश्वत के काम नहीं होता और फाइलों को जानबूझकर लंबित रखा जाता है। स्थानीय स्तर पर यह मांग उठ रही है कि दोषी अधिकारियों पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई, यहां तक कि सेवा समाप्ति जैसे कठोर कदम उठाए जाएं, ताकि भविष्य में इस प्रकार की लापरवाही और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया जा सके।

जवाबदेही पर बड़ा सवाल

यह मामला केवल एक हितग्राही की परेशानी नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का आईना है जहां जवाबदेही की कमी और लापरवाही आम नागरिकों को परेशान करती है। “बादाम कांड” ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि पारदर्शिता और जिम्मेदारी सुनिश्चित किए बिना सरकारी तंत्र में सुधार संभव नहीं है।

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