अम्बिकापुर 5 मई 2026/ गांधी चौक की भीड़ में अचानक गालियों की गूंज और फिर ताबड़तोड़ घूंसे… एक मामूली थूकने का विवाद देखते ही देखते हिंसा में बदल गया और सरेआम एक युवक को निशाना बना लिया गया… 02 मई की शाम, पान दुकान के सामने खड़े पंकज शुक्ला, पिता रविशंकर शुक्ला, उम्र 36 वर्ष, निवासी नमनाकला अंबिकापुर अपने साथियों मनीष अम्बस्ट और रानू पाण्डेय के साथ बातचीत में थे, तभी अनिकेत त्रिपाठी ने गुटखा थूका और बात बढ़ी… अगले ही पल अनिकेत अपने साथियों मजहर खान, जय सोनी और ओम सोनी के साथ वापस लौटा, माहौल अचानक गरमा गया, सार्वजनिक जगह पर गंदी गालियां, अपमान और फिर हाथ-मुक्कों के साथ कड़ा से हमला, पंकज के सिर पर चोटें आईं और भीड़ तमाशबीन बन गई… मामला सीधे कोतवाली पहुंचा और धारा 296, 351, 115(2), 191(2), 352 बीएनएस के तहत अपराध दर्ज हुआ, लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई… आरोपी वारदात के बाद फरार हो गए और पुलिस के लिए यह सिर्फ मारपीट नहीं बल्कि एक हिस्ट्रीशीटर का खुला चुनौती बन गया… कोतवाली टीम ने लगातार लोकेशन ट्रैक की, दबिश की प्लानिंग हुई और 05 मई को रसुलपुर के एक ठिकाने पर घेराबंदी कर दी गई… दरवाजा खुलते ही खेल खत्म, सामने था वही चेहरा जिसकी तलाश थी—मजहर खान, पिता सेराज उर्फ सिराज, उर्फ सिराजुद्दीन अंसारी, उम्र 37 वर्ष, निवासी इमलीपारा अंबिकापुर… उसके साथ दो नाबालिग भी पकड़े गए, पूछताछ में परतें खुलती चली गईं और आखिरकार गिरफ्तारी पक्की हो गई… पुलिस ने सिर्फ आरोपी को पकड़ा ही नहीं बल्कि उसके पूरे आपराधिक इतिहास की फाइल खोल दी, BNSS की धारा 129 के तहत गुंडा बदमाश फाइल तैयार की गई और अब जिला बदर की कार्रवाई भी तेज हो चुकी है… इस पूरे ऑपरेशन में थाना प्रभारी निरीक्षक शशिकांत सिन्हा और उनकी टीम ने जिस तरह से फरार आरोपी को ट्रैक कर दबोचा, उसने साफ कर दिया कि अब हिस्ट्रीशीटरों के लिए शहर में छिपने की जगह नहीं बची… बहरहाल, यह घटना एक कड़वा सच छोड़ जाती है—छोटी सी लापरवाही से शुरू हुआ विवाद जब अहंकार में बदलता है तो सीधे कानून के शिकंजे में खत्म होता है, क्योंकि सड़क पर किया गया हर गलत कदम आखिरकार जेल की ओर ही जाता है।
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